पृष्ठभूमि: छोटा गोविंदपुर का सन्नाटा
जमशेदपुर के बाहरी इलाके छोटा गोविंदपुर में निशांत का परिवार एक खुशहाल जीवन जी रहा था। उनके पिता टाटा ग्रुप में कार्यरत थे और माँ एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका थीं। घर में दादी, बड़ी बहन और एक छोटा भाई भी थे। इलाका शांत था, लेकिन शाम ढलते ही यहाँ एक अजीब सा सन्नाटा पसर जाता था। कच्ची सड़कें, चारों तरफ खाली प्लॉट और दूर-दूर तक फैली झाड़ियाँ इस जगह को रात में डरावना बना देती थीं।
पड़ोस का रहस्य और मनहूसियत की शुरुआत
निशांत के घर के पास एक पंजाबी परिवार रहता था, जिनके बारे में मोहल्ले में अफवाह थी कि वे काला जादू करते हैं। जब उस परिवार के मुखिया की मौत हुई, तो उनकी बेटी रीता मानसिक रूप से अस्थिर हो गई। वह छत पर अजीब तरीके से चलती और अपने चारों ओर थूकती रहती थी। उसी दौरान मोहल्ले में दो हफ्तों के भीतर तीन नौजवानों की अकाल मृत्यु (ट्रेन से कटना, फांसी और डूबना) हो गई। पूरा मोहल्ला दहशत में आ गया।
बहन का बदलना और अदृश्य साया
असली खौफ तब शुरू हुआ जब निशांत की बड़ी बहन ने कॉलेज जाना शुरू किया। धीरे-धीरे वह गुमसुम रहने लगी और उसकी सेहत गिरने लगी। एक दोपहर घर वालों ने उसके कमरे से एक मर्द की आवाज में नमाज पढ़ने की आवाज सुनी। जब कमरा खोला गया, तो उसकी आँखें सफेद हो चुकी थीं और वह अरबी भाषा में गालियाँ दे रही थी।
घर का माहौल नर्क बन चुका था। छत पर जानवरों की हड्डियाँ मिलतीं, इत्र की तेज खुशबू आती और कभी-कभी खिड़कियों में सिंदूर और लौंग की पुड़िया रखी मिलती।
ढोंगी मौलवी और धोखे का जाल
इलाज के लिए पहले ‘राजू’ नाम के शख्स को बुलाया गया, जिसे रूह ने छत से पटक दिया। फिर गुमला के ‘शिव बाबा’ से विभूति लाई गई, लेकिन रास्ते में रूह ने निशांत के पिता की आवाज निकालकर उन्हें भ्रमित करने की कोशिश की।
अंत में ताजी बाबा (मौलवी) को बुलाया गया। मौलवी ने नाटक किया कि उसने रूह को निकाल दिया है और घर से ताबीज और हड्डियाँ निकालीं। उसने ₹5,000 (जो उस समय बड़ी रकम थी) लिए। लेकिन कुछ समय बाद बहन की हालत और बिगड़ गई। अब उसके शरीर में एक नहीं, बल्कि दो रूहें थीं।
अंतिम प्रहार: सिद्ध पुरुष का आगमन
बाद में एक ऐसे सिद्ध पुरुष मिले जिन पर माता रानी आती थी। उन्होंने खुलासा किया कि मौलवी ने कोई इलाज नहीं किया था, बल्कि पैसे ऐंठने के लिए अपनी ही एक रूह उनके घर में छोड़ दी थी।
एक भयानक क्रिया की गई, जिसमें कस्तूरी और कछुए की खोल जैसी दुर्लभ चीजों का इस्तेमाल हुआ। सिद्ध पुरुष ने उन रूहों को एक मटके में बांधा और निशांत के पिता के साथ पास की नहर में बहाने गए। वहां उन पर अदृश्य शक्तियों ने हमला किया, लेकिन मंत्रों के बल पर वे जीत गए।